पोक्सो और जघन्य अपराधों में फोरेंसिक रिपोर्ट को लेकर हाईकोर्ट सख्त, तय समय सीमा में रिपोर्ट देने के निर्देश
28 Sep, 2026
by Kuldeep s Rautela
फोरेंसिक रिपोर्ट में देरी से प्रभावित न हो जांच, हाईकोर्ट ने तय की डेडलाइन
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पोक्सो और एनडीपीएस एक्ट समेत जघन्य अपराधों की विवेचना में फोरेंसिक रिपोर्ट मिलने में होने वाली देरी को गंभीरता से लिया है। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने फोरेंसिक निदेशक को निर्देश दिए हैं कि पोक्सो से जुड़े मामलों में 45 दिन और जघन्य अपराधों में 75 दिन के भीतर फोरेंसिक रिपोर्ट पुलिस को उपलब्ध कराई जाए, ताकि विवेचना पूरी कर समय से चार्जशीट दाखिल की जा सके।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गंभीर आपराधिक मामलों में फोरेंसिक रिपोर्ट विवेचना का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। रिपोर्ट मिलने में देरी होने से कई बार पुलिस की विवेचना और आरोप पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। ऐसे में फोरेंसिक जांच को भी टाइम बाउंड तरीके से पूरा करना जरूरी है।
चार्जशीट समय पर दाखिल करने में मिलेगी मदद
हाईकोर्ट की ओर से तय समय सीमा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फोरेंसिक जांच लंबित रहने के कारण गंभीर मामलों की विवेचना अनावश्यक रूप से लंबी न खिंचे। पोक्सो जैसे मामलों में 45 दिन और अन्य जघन्य अपराधों में 75 दिन के भीतर रिपोर्ट पुलिस को मिलने से जांच अधिकारी समय से आवश्यक दस्तावेज और साक्ष्य जुटाकर चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर सकेंगे।
फोरेंसिक रिपोर्ट में देरी पर नजर
अदालत के निर्देशों के बाद फोरेंसिक प्रयोगशाला स्तर पर लंबित मामलों की निगरानी और समयबद्ध रिपोर्टिंग पर जोर रहेगा। विशेष रूप से ऐसे मामलों में, जिनमें वैज्ञानिक साक्ष्य अभियोजन की विवेचना के लिए महत्वपूर्ण हैं, रिपोर्ट में देरी का सीधा असर आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था के जरिए फोरेंसिक जांच, पुलिस विवेचना और चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। इससे गंभीर अपराधों की जांच को निर्धारित समय सीमा में आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।