उत्तराखंड में आंचल डेयरी का बड़ा विस्तार, लालकुआं- सितारगंज में नए प्लांट और पर्यटन स्थलों पर खुलेंगे आंचल कैफे

हल्द्वानी। उत्तराखंड में दुग्ध व्यवसाय को मजबूत करने और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए उत्तराखंड को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (UCDF) ने आंचल डेयरी के विस्तार की बड़ी कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत प्रदेश में दूध के प्रसंस्करण की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ नए उत्पाद तैयार करने, आधुनिक मार्केटिंग नेटवर्क विकसित करने और पर्यटन स्थलों तक आंचल के उत्पादों की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
UCDF के प्रबंध निदेशक जयदीप अरोरा ने इस विस्तार योजना की जानकारी देते हुए बताया कि लालकुआं और सितारगंज में नई क्षमताओं के विकास के साथ आंचल के उत्पादों को प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य केवल आंचल डेयरी के कारोबार का विस्तार करना नहीं, बल्कि प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और अतिरिक्त दूध का राज्य के भीतर ही बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।
लालकुआं में डेढ़ लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का नया प्लांट
जयदीप अरोरा के मुताबिक लालकुआं डेयरी में वर्तमान में करीब 50 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला पुराना प्लांट संचालित है। वहीं पीक सीजन में क्षेत्र से दूध का उपार्जन बढ़कर करीब डेढ़ लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच जाता है।
मौजूदा क्षमता और दूध की उपलब्धता में बड़े अंतर के चलते अतिरिक्त दूध के प्रसंस्करण में परेशानी आती है। इसे देखते हुए लालकुआं में 85 करोड़ की लागत से डेढ़ लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का अत्याधुनिक और पूरी तरह ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किया जा रहा है।अरोरा के अनुसार नई क्षमता विकसित होने के बाद दूध के प्रसंस्करण में आने वाली मौजूदा दिक्कतों को काफी हद तक दूर किया जा सकेगा। इससे भविष्य में अधिक मात्रा में दूध का उपार्जन करने और ज्यादा से ज्यादा पशुपालकों को डेयरी के नेटवर्क से जोड़ने की क्षमता भी विकसित होगी।

“लालकुआं में मौजूदा प्रोसेसिंग क्षमता पीक सीजन में आने वाले दूध के मुकाबले कम पड़ रही है। नई डेढ़ लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता की ऑटोमेटेड यूनिट बनने के बाद दूध के प्रसंस्करण की क्षमता बढ़ेगी और दुग्ध उत्पादकों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
अभी अतिरिक्त दूध के कन्वर्जन के लिए उसे दूसरे राज्यों में भेजना पड़ता है। इससे परिवहन पर हर साल करीब तीन से चार करोड़ रुपये खर्च होते हैं। सितारगंज में प्लांट शुरू होने के बाद यह खर्च बचेगा और दूध से बनने वाले उत्पादों का वैल्यू एडिशन प्रदेश के भीतर ही किया जा सकेगा।”
जयदीप अरोरा, एम डी यूसीडीएफ

सितारगंज में बनेगा मिल्क पाउडर और आइसक्रीम प्लांट
लालकुआं के साथ ही सितारगंज में नई यूनिट स्थापित करने का काम भी शुरू किया गया है। यहां मिल्क पाउडर, आइसक्रीम और बेकरी उत्पाद तैयार करने की योजना है।
UCDF के एमडी जयदीप अरोरा के अनुसार प्रदेश में अब तक मिल्क पाउडर तैयार करने की पर्याप्त सुविधा नहीं होने के कारण अतिरिक्त दूध को कन्वर्जन के लिए दूसरे राज्यों में भेजना पड़ता है। इससे परिवहन और ढुलाई पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च होते हैं।
उन्होंने बताया कि सितारगंज में यूनिट विकसित होने के बाद अतिरिक्त दूध को प्रदेश के भीतर ही प्रोसेस कर मिल्क पाउडर और दूसरे मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे।
आंचल कैफे से पर्यटन बाजार पर नजर
आंचल डेयरी अब अपने उत्पादों की बिक्री को पारंपरिक दूध बूथ और मिल्क पार्लर तक सीमित नहीं रखना चाहती। इसके लिए 'आंचल कैफे' मॉडल का विस्तार किया जा रहा है।
चारधाम यात्रा मार्ग पर पहले से आंचल कैफे और मिल्क बूथ संचालित किए जा रहे हैं। अब राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों को ध्यान में रखते हुए टिहरी झील, धनोल्टी, नैनीताल और अल्मोड़ा में भी नए आंचल कैफे खोलने की तैयारी है।
पर्यटन स्थलों पर बढ़ाया जा रहा नेटवर्क
जयदीप अरोरा के अनुसार पर्यटन स्थलों पर आंचल कैफे बढ़ाने का मकसद पर्यटकों और स्थानीय लोगों को एक ही जगह पर आंचल के दूध और दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराना है। इससे आंचल के उत्पादों का बाजार बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
आंचल कैफे के मॉडल में दूध, आइसक्रीम, शेक और अन्य दुग्ध उत्पादों को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की योजना पहले से काम कर रही है।
पहाड़ों में मोबाइल फूड वैन बनेगी नया विकल्प
पर्वतीय पर्यटन स्थलों पर स्थायी दुकान या कैफे के लिए जगह की समस्या को देखते हुए UCDF अब मोबाइल फूड वैन के जरिए भी आंचल के उत्पादों की बिक्री बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
जयदीप अरोरा के अनुसार आगामी माह में पहली मोबाइल फूड वैन लॉन्च किए जाने की तैयारी है। इसके जरिए ऐसे पर्यटन स्थलों और भीड़ वाले क्षेत्रों तक आंचल के उत्पाद पहुंचाए जाएंगे, जहां स्थायी आउटलेट खोलना मुश्किल है।
अगले वर्ष कैप्सूल कैफे की तैयारी
मोबाइल फूड वैन के बाद अगले वर्ष 'कैप्सूल कैफे' कॉन्सेप्ट भी शुरू करने की तैयारी है। यह मॉडल खासतौर पर उन पर्वतीय और पर्यटन क्षेत्रों के लिए उपयोगी होगा, जहां जगह सीमित है।
कम स्थान में आंचल के प्रमुख उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए छोटे और आधुनिक आउटलेट विकसित किए जाएंगे। इससे पर्यटन स्थलों पर आंचल की मौजूदगी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
दीपावली पर चार तरह की मिठाइयां और गिफ्ट हैंपर
आंचल डेयरी आगामी दीपावली को लेकर भी विशेष तैयारी कर रही है। इस बार उपभोक्ताओं के लिए चार प्रकार की मिठाइयां उपलब्ध कराने की योजना है। इसके अलावा विशेष गिफ्ट हैंपर्स भी बाजार में उतारे जाएंगे। जो इस त्यौहार "आँचल"के विश्वास औऱ विकल्प के मौजूद रहेंगे
खास बात यह है कि इस बार मिठाइयों का उत्पादन पूरी तरह उत्तराखंड के भीतर ही करने की तैयारी है। इससे प्रदेश में स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ आंचल के ब्रांड को त्योहारों के बाजार में भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
पशुपालकों की आय बढ़ाना भी लक्ष्य
UCDF के एमडी जयदीप अरोरा के अनुसार डेयरी के विस्तार का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य पशुपालकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। दूध की खरीद, प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और बिक्री—पूरी व्यवस्था को प्रदेश के भीतर मजबूत करने से दुग्ध उत्पादकों को इसका लाभ मिल सकता है।
अरोरा का कहना है कि दूध से अधिक से अधिक मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने और उन्हें आंचल ब्रांड के माध्यम से बाजार तक पहुंचाने से पशुपालकों के लिए दूध की मांग और बाजार दोनों को बढ़ाया जा सकेगा।
राज्य के भीतर मजबूत होगी पूरी डेयरी चेन
लालकुआं में नई प्रोसेसिंग क्षमता, सितारगंज में मिल्क पाउडर और अन्य उत्पादों की यूनिट, पर्यटन स्थलों पर आंचल कैफे तथा मोबाइल और कैप्सूल कैफे जैसे प्रयोगों के जरिए UCDF आंचल को केवल दूध बेचने वाले ब्रांड से आगे ले जाने की कोशिश कर रहा है।
इस विस्तार से अतिरिक्त दूध के बेहतर उपयोग, परिवहन लागत में कमी, नए दुग्ध उत्पादों के निर्माण और बाजार विस्तार की उम्मीद है। साथ ही पशुपालकों से लेकर उपभोक्ताओं तक पूरी डेयरी सप्लाई चेन को प्रदेश में मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। आने वाले समय में आंचल डेयरी का फोकस उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ उत्पादों में विविधता, बेहतर मार्केटिंग और पर्यटन आधारित बाजार में अपनी पहुंच मजबूत करने पर रहेगा।