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06 Aug, 2026 by Admin

लोक संस्कृति, मातृभाषा और पारंपरिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की अनूठी पहल

हल्द्वानी, 6 अगस्त। उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक खान-पान, कुमाऊँनी भाषा और हरेला पर्व की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल, महिला प्रकोष्ठ, जिला नैनीताल द्वारा 8 अगस्त 2026 (शनिवार) को हल्द्वानी में एक भव्य सांस्कृतिक आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में ‘हरेला क्वीन’, ‘सावन क्वीन’ एवं कुमाऊँनी व्यंजन प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

परिणय वाटिका में दोपहर बाद शुरू होगा कार्यक्रम

यह कार्यक्रम हल्द्वानी स्थित परिणय वाटिका बैंक्वेट हॉल में शाम 3 बजे से प्रारंभ होगा। कार्यक्रम का शुभारंभ आईजी नैनीताल श्रीमती निवेदिता कुकरेती द्वारा किया जाएगा। आयोजन में जिले भर से बड़ी संख्या में महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं सांस्कृतिक प्रेमियों के शामिल होने की संभावना है।

प्रेस वार्ता में दी आयोजन की जानकारी

आयोजन की जानकारी देते हुए महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष श्रीमती कुसुम दिगारी ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल प्रतियोगिताओं का आयोजन करना नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, कुमाऊँनी भाषा, पारंपरिक वेशभूषा और स्थानीय व्यंजनों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी तेजी से आधुनिकता की ओर बढ़ रही है, ऐसे में अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को सहेजना बेहद आवश्यक है।

हरेला पर्व देगा पर्यावरण संरक्षण का संदेश

कुसुम दिगारी ने बताया कि उत्तराखंड का लोकपर्व हरेला प्रकृति, हरियाली, पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण का प्रतीक है। इसी संदेश को आगे बढ़ाने के लिए आयोजन के दौरान लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रकृति और संस्कृति दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों का संरक्षण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

45 वर्ष से अधिक आयु के प्रतिभागियों के लिए विशेष प्रतियोगिताएं

आयोजकों के अनुसार हरेला क्वीन, तथा कुमाऊँनी व्यंजन प्रतियोगिता विशेष रूप से 45 वर्ष से अधिक आयु के प्रतिभागियों के लिए आयोजित की जा रही हैं। इसका उद्देश्य उन महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को मंच प्रदान करना है, जिन्होंने वर्षों से अपनी संस्कृति, भाषा और पारंपरिक खान-पान को जीवंत बनाए रखा है। प्रतियोगिता के माध्यम से प्रतिभागी अपनी मातृभाषा, पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक धरोहर का प्रभावशाली प्रदर्शन करेंगे।

नई पीढ़ी को मिलेगा संस्कृति से जुड़ने का अवसर

आयोजकों का मानना है कि ऐसे आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होते, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त प्रयास भी हैं। कुमाऊँनी व्यंजनों, लोक संस्कृति और पारंपरिक परिधानों के माध्यम से युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने और उस पर गर्व करने की प्रेरणा मिलेगी।

महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को मिलेगा सम्मान का मंच

यह आयोजन महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को अपनी प्रतिभा, अनुभव और सांस्कृतिक ज्ञान को समाज के सामने प्रस्तुत करने का अवसर देगा। साथ ही यह मंच पीढ़ियों के बीच सांस्कृतिक संवाद स्थापित करने का कार्य भी करेगा, जिससे पारंपरिक ज्ञान और लोक विरासत का संरक्षण संभव हो सकेगा।

जनभागीदारी की अपील

कुसुम दिगारी ने जनपद की सभी महिलाओं एवं नागरिकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में भाग लेकर इसे सफल बनाएं। उन्होंने कहा कि समाज की सक्रिय भागीदारी से ही उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखा जा सकता है और आने वाली पीढ़ियों तक प्रभावी रूप से पहुंचाया जा सकता है

मुख्य बिंदु


तिथि: 8 अगस्त 2026 (शनिवार)

समय: शाम 3:00 बजे


स्थान: परिणय वाटिका बैंक्वेट हॉल, हल्द्वानी


मुख्य अतिथि: आईजी नैनीताल श्रीमती निवेदिता कुकरेती


मुख्य आकर्षण: हरेला क्वीन, सावन क्वीन एवं कुमाऊँनी व्यंजन प्रतियोगिता


विशेष पात्रता: 45 वर्ष से अधिक आयु के प्रतिभागी