जमीन हमारी, खनिज हमारे… फिर अधिकार हमारा क्यों नहीं? MMDR Bill पर किसान मंच का CM धामी को पत्र...
17 Aug, 2026
by Admin
MMDR Bill की धारा 9D पर उत्तराखंड में हलचल, खनिज राजस्व और राज्य के अधिकारों को लेकर उठे बड़े सवाल
दहरादून। उत्तराखंड के खनिज संसाधनों को लेकर किसान मंच ने केंद्र सरकार के नए MMDR Amendment Bill 2026 पर सवाल उठाए हैं। मंच की सबसे बड़ी चिंता बिल की धारा 9D को लेकर है। किसान मंच का कहना है कि इस प्रावधान से भविष्य में खनिजों से मिलने वाले राजस्व और उस पर राज्य के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष कार्तिक उपाध्याय ने इस संबंध में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर पूरे मामले को गंभीरता से देखने की मांग की है।
जानिए आखिर मामला क्या है?
उत्तराखंड में रेत, बजरी, पत्थर और दूसरे खनिजों से सरकार को राजस्व मिलता है। खनन से होने वाली आय राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक स्रोत है। किसान मंच को आशंका है कि MMDR Amendment Bill में प्रस्तावित नई व्यवस्था लागू होने के बाद खनिजों से जुड़े कुछ आर्थिक अधिकारों पर केंद्र का प्रभाव बढ़ सकता है।
मंच का सवाल है कि अगर खनिज उत्तराखंड की जमीन से निकलते हैं और उनके खनन का असर भी प्रदेश के पर्यावरण, नदियों और स्थानीय लोगों पर पड़ता है, तो उनसे मिलने वाले राजस्व और फैसलों में राज्य की भूमिका कमजोर क्यों हो?
खनिज उत्तराखंड के, तो राजस्व और निर्णय में राज्य की भूमिका कितनी?’
किसान मंच ने इस पूरे विषय को उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों से जोड़कर देखा है। मंच का कहना है कि प्रदेश में खनन से होने वाले पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का सामना स्थानीय स्तर पर उत्तराखंड को ही करना पड़ता है।
प्रत्यक्ष प्रभाव राज्य को झेलना पड़ता है, उनसे मिलने वाले राजस्व और उससे जुड़े आर्थिक निर्णयों में राज्य की भूमिका कमजोर क्यों होनी चाहि
किसान मंच की मुख्य मांग..
किसान मंच चाहता है कि राज्य सरकार पहले इस बिल का कानूनी और आर्थिक स्तर पर पूरा अध्ययन कराए। सरकार यह साफ करे कि धारा 9D लागू होने के बाद उत्तराखंड को खनिजों से मिलने वाले राजस्व पर क्या असर पड़ेगा।
मंच ने यह भी मांग की है कि केंद्र सरकार के सामने उत्तराखंड की भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों को मजबूती से रखा जाए।
मंच चाहता है कि सरकार विशेष रूप से इन बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करे—
क्या राज्य की वर्तमान कर/लेवी लगाने की शक्तियों पर कोई असर पड़ेगा?
खनिजों से मिलने वाले राज्य के राजस्व पर इसका क्या प्रभाव हो सकता है?
भविष्य में राज्य अपने खनिज संसाधनों से नए राजस्व स्रोत विकसित कर पाएगा या नहीं?
खनिज-युक्त भूमि से संबंधित राज्य के आर्थिक अधिकारों की स्थिति क्या रहेगी?
यदि राज्य को संभावित वित्तीय नुकसान होता है तो उसका अनुमान कितना है?
केंद्र सरकार के सामने उत्तराखंड की ओर से इस विषय पर क्या पक्ष रखा गया है?
इन सवालों का जवाब सामने आने के बाद ही संशोधन के प्रदेश पर पड़ने वाले वास्तविक आर्थिक प्रभाव का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।
पुराने और भविष्य के राजस्व का भी हिसाब हो
किसान मंच का कहना है कि केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि आज राज्य को खनन से कितना पैसा मिल रहा है। यह भी देखना जरूरी है कि आने वाले वर्षों में खनिजों से राज्य की कितनी आय हो सकती है और नए कानून का उस पर क्या असर पड़ेगा।
मंच चाहता है कि सरकार पुराने बकाये और भविष्य में होने वाली संभावित आय का भी आकलन करे, ताकि प्रदेश को किसी तरह का आर्थिक नुकसान होने की स्थिति में समय रहते कदम उठाए जा सकें।
सरकार से स्पष्ट जवाब चाहता है किसान मंच
किसान मंच की मांग है कि सरकार यह भी बताए कि इस बिल को लेकर केंद्र सरकार से उत्तराखंड की राय ली गई थी या नहीं। यदि राय ली गई थी तो राज्य सरकार ने केंद्र के सामने क्या सुझाव या आपत्तियां रखीं।
मंच का कहना है कि यह सिर्फ सरकार और विपक्ष का राजनीतिक मुद्दा नहीं है। यह उत्तराखंड के प्राकृतिक संसाधनों और आने वाले समय में राज्य की आय से जुड़ा विषय है। इसलिए सरकार को जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
सरकार के अगले कदम पर नजर..
किसान मंच ने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले में राज्य के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार MMDR Amendment Bill की धारा 9D का किस तरह अध्ययन करती है और उत्तराखंड के खनिज संसाधनों से जुड़े अधिकारों को लेकर केंद्र के सामने क्या रुख अपनाती है।
सीधी बात यह है कि किसान मंच चाहता है कि उत्तराखंड के खनिजों से होने वाली कमाई और उनसे जुड़े फैसलों में राज्य के हित सुरक्षित रहें और किसी नए कानून के कारण भविष्य में प्रदेश को आर्थिक नुकसान न हो।