
हरिद्वार
सावन की कांवड़ यात्रा में इस बार जहां लाखों शिवभक्त भोलेनाथ की भक्ति में लीन हैं, वहीं हरिद्वार पहुंचा एक दंपति अपनी अनोखी यात्रा के कारण श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। यह कहानी केवल कांवड़ यात्रा की नहीं, बल्कि उस अटूट विश्वास की है, जिसमें एक पत्नी अपने दिव्यांग पति के लिए सहारा ही नहीं, बल्कि उसके कदम और उसका संबल बन गई है। प्रेम, त्याग, साहस और शिवभक्ति का यह संगम हर किसी की आंखें नम कर रहा है।

मोदीनगर से हरिद्वार तक लगभग 180 किलोमीटर की कठिन यात्रा... तपती सड़कें, बारिश, थकान और लंबे सफर की चुनौतियां... लेकिन इन सबके बीच आशा नाम की एक महिला के चेहरे पर न थकान है और न ही कोई शिकायत। कारण है उनका संकल्प। वह अपने दिव्यांग पति सचिन को कंधों पर बैठाकर हरिद्वार तक लेकर आई हैं, ताकि दोनों मिलकर भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकें।
यह दृश्य जहां भी लोगों ने देखा, कदम खुद-ब-खुद रुक गए। राहगीरों ने इस दंपति का हौसला बढ़ाया, कुछ ने फूल बरसाए, तो कई लोगों ने उनके लिए जल और भोजन की व्यवस्था की। हर कोई इस अद्भुत समर्पण को नमन करता दिखाई दिया।
आशा का कहना है कि उनके लिए यह यात्रा किसी बोझ की नहीं, बल्कि सौभाग्य की यात्रा है। उनका मानना है कि विवाह केवल सात फेरों का बंधन नहीं, बल्कि सुख-दुख में एक-दूसरे का सहारा बनने का वचन है। यदि पति चल नहीं सकता, तो पत्नी उसके कदम बन सकती है। यही सच्चा जीवनसाथी होने का अर्थ है।