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17 Aug, 2026 Kuldeep s Rautela by Kuldeep s Rautela

भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में उत्तराखंड की एंट्री मजबूत, दो नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी


भाजपा संगठन में बड़ा फेरबदल, उत्तराखंड के तीरथ और बलूनी पर भरोसा


नई दिल्ली/देहरादून। भारतीय जनता पार्टी ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोमवार को संगठन में नई जिम्मेदारियों की घोषणा की। नई टीम में कई वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण पद सौंपे गए हैं। उत्तराखंड से भी दो प्रमुख नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर अहम जिम्मेदारी मिली है।

तीरथ सिंह रावत बने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। राष्ट्रीय संगठन में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने को उत्तराखंड की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
तीरथ सिंह रावत लंबे समय से भाजपा संगठन और राजनीति में सक्रिय रहे हैं। राष्ट्रीय टीम में जिम्मेदारी मिलने के बाद उनकी भूमिका अब प्रदेश से बाहर पार्टी के व्यापक संगठनात्मक कामकाज में भी महत्वपूर्ण होगी।

अनिल बलूनी को राष्ट्रीय मीडिया संयोजक की जिम्मेदारी

वहीं, उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनिल बलूनी को भाजपा का राष्ट्रीय मीडिया संयोजक बनाया गया है। मीडिया और संचार से जुड़े अनुभव को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बलूनी अब राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की मीडिया रणनीति, संवाद और प्रचार से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों में भूमिका निभाएंगे।

कई वरिष्ठ नेताओं को मिली जिम्मेदारी

भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में कई वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग पदों पर जिम्मेदारी दी गई है। नई टीम में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय महासचिव और अन्य संगठनात्मक पदों पर नियुक्तियां की गई हैं। पार्टी ने संगठन को आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार करने पर जोर दिया है।

2027 के चुनावों पर भी रहेगी नजर

भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम का गठन ऐसे समय हुआ है जब उत्तराखंड समेत कई राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेज होनी हैं। ऐसे में नई टीम के सामने संगठन को मजबूत करने, राज्यों में समन्वय बढ़ाने और चुनावी रणनीति को धार देने की चुनौती होगी।
उत्तराखंड के दो नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने से प्रदेश भाजपा में भी इसे बड़ी राजनीतिक और संगठनात्मक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।