खनन में डिजिटल पहरा—RFID से ट्रकों की पल-पल निगरानी,कागज से डिजिटल निगरानी की ओर बढ़ता खनन विभाग
13 Aug, 2026
by Admin
अवैध खनन पर शिकंजा: अब हर खनन वाहन की होगी डिजिटल पहचान, RFID से रुकेगा फर्जीवाड़ा
समय भी बचेगा, निगरानी भी होगी मजबूत; चेकगेट पर दस्तावेज दिखाने की जरूरत होगी कम
देहरादून। उत्तराखंड में अवैध खनन और खनिजों के अनधिकृत परिवहन पर प्रभावी रोक लगाने के लिए निगरानी व्यवस्था को और तकनीकी बनाया जा रहा है। इसी दिशा में राज्य के खनन वाहनों में रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन यानी RFID प्रणाली को लागू करने की व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसका उद्देश्य खनिज परिवहन को अधिक पारदर्शी बनाना, वाहनों की पहचान को डिजिटल करना और चेकगेट पर होने वाली मैनुअल प्रक्रिया को कम करना है।
खनन विभाग पहले से ही डिजिटल निगरानी व्यवस्था, RFID रीडर, कैमरों और अन्य तकनीकी साधनों का इस्तेमाल कर रहा है। विभाग की आधिकारिक डिजिटल प्रणाली में RFID टैग को राज्य के भीतर खनिज परिवहन की ट्रैकिंग और वाहन पहचान व्यवस्था को बेहतर बनाने वाला माध्यम बताया गया है।
क्या है RFID और कैसे काम करेगा?
RFID यानी Radio Frequency Identification एक ऐसी तकनीक है, जिसमें वाहन पर लगाए गए विशेष टैग की पहचान रेडियो तरंगों के माध्यम से की जाती है। चेकगेट पर लगा RFID रीडर टैग को पढ़कर संबंधित वाहन की पहचान सिस्टम तक पहुंचाता है। इसके चलते वाहन को हर बार कागजी दस्तावेज दिखाने या मैनुअल तरीके से जानकारी दर्ज कराने की जरूरत कम हो सकती है।
सरल शब्दों में समझें तो RFID वाहन की डिजिटल पहचान की तरह काम करेगा। वाहन जब निर्धारित चेकगेट से गुजरेगा तो सिस्टम उसके टैग को पहचान सकेगा और उससे जुड़ी जानकारी डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज की जा सकेगी।
उत्तराखंड की खनन निगरानी व्यवस्था में RFID के साथ आधुनिक कैमरों और अन्य तकनीकों के इस्तेमाल की योजना पहले से सामने आ चुकी है। राज्य में खनन गतिविधियों की निगरानी के लिए MDTSS व्यवस्था के तहत RFID रडार और कैमरा आधारित निगरानी को भी शामिल किया गया है।
खनन व्यवस्था में क्या होंगे RFID के फायदे?
1. चेकगेट पर समय की होगी बचत
RFID आधारित पहचान से वाहन की जानकारी स्वतः सिस्टम में दर्ज होने की व्यवस्था की जा सकती है। इससे बार-बार कागजात की जांच और मैनुअल एंट्री की प्रक्रिया कम होगी और वैध वाहनों की आवाजाही अपेक्षाकृत तेज हो सकेगी।
2. फर्जी दस्तावेज और फर्जीवाड़े पर लगामवाहन के साथ डिजिटल पहचान जुड़ने से केवल कागजी दस्तावेजों के आधार पर होने वाली जांच पर निर्भरता कम होगी। इससे फर्जी पास, गलत वाहन विवरण और अनधिकृत परिवहन की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
3.वैध खनन पर निगरानी मजबूत
किस वाहन ने किस निर्धारित रास्ते और चेकगेट से प्रवेश या निकासी की, इसका डिजिटल रिकॉर्ड निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बना सकता है। RFID को GPS और अन्य डिजिटल प्रणालियों के साथ जोड़ने पर वाहन की गतिविधियों की निगरानी और मजबूत हो सकती है।
4. ओवरलोडिंग और अनियमितताओं पर नियंत्रण
RFID व्यवस्था को वे-ब्रिज और अन्य डिजिटल प्रणालियों से जोड़कर वाहन की पहचान और खनिज की मात्रा से संबंधित जानकारी को एक साथ देखा जा सकता है। इससे ओवरलोडिंग और अनधिकृत खनिज परिवहन की जांच में मदद मिलेगी।
5. ईमानदार कारोबारियों को राहत
तकनीक आधारित व्यवस्था का एक बड़ा फायदा यह भी है कि नियमों का पालन करने वाले वाहन चालकों और खनन कारोबारियों को अनावश्यक कागजी प्रक्रिया और लंबी जांच से राहत मिल सकती है। इससे वैध खनन परिवहन को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।
राजस्व चोरी रोकने में भी अहम भूमिका
खनिजों के अवैध परिवहन से सरकार को राजस्व का नुकसान होता है। RFID आधारित डिजिटल पहचान व्यवस्था में वाहनों की आवाजाही का रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से निगरानी तंत्र मजबूत होगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कौन-सा वाहन अधिकृत तरीके से खनिज लेकर जा रहा है और कौन-सा वाहन नियमों का उल्लंघन कर रहा है।
उत्तराखंड खनन विभाग ने हाल के वर्षों में ई-गवर्नेंस और तकनीकी निगरानी को बढ़ाया है। विभाग के मुताबिक वर्ष 2024-25 में खनन से ₹1100 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ था।
निदेशक राजपाल लेघा का जोर-तकनीक से बनेगी व्यवस्था पारदर्शी
खनन निदेशक राजपाल लेघा के रुख के अनुसार खनन व्यवस्था को केवल कागजी जांच तक सीमित रखने के बजाय तकनीक से जोड़ना जरूरी है। RFID जैसी व्यवस्था का मकसद वैध खनन कारोबार को परेशान करना नहीं, बल्कि खनिजों की आवाजाही को डिजिटल रिकॉर्ड में लाकर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।
लेघा के दृष्टिकोण को इस रूप में समझा जा सकता है कि तकनीक जितनी मजबूत होगी, निगरानी उतनी ही प्रभावी होगी। इससे एक ओर नियमों का पालन करने वाले कारोबारियों के लिए प्रक्रिया सरल हो सकती है, वहीं दूसरी ओर अवैध खनन और अनधिकृत परिवहन करने वालों पर कार्रवाई के लिए विभाग के पास अधिक मजबूत डिजिटल आधार उपलब्ध होगा।
खनन विभाग पहले भी RFID आधारित निगरानी को अवैध खनन पर अंकुश और राजस्व संरक्षण से जोड़ता रहा है। विभाग की डिजिटल प्रणाली में RFID टैग को वाहन पहचान और खनिज परिवहन की ट्रैकिंग के लिए महत्वपूर्ण तकनीक बताया गया है।
कागज से डिजिटल निगरानी की ओर बढ़ता खनन विभाग
खनन क्षेत्र में RFID को केवल एक चिप या टैग के तौर पर देखने के बजाय इसे पूरे डिजिटल निगरानी तंत्र का हिस्सा माना जा रहा है। RFID के साथ GPS, कैमरा, वे-ब्रिज और ई-परिवहन दस्तावेजों जैसी व्यवस्थाएं आपस में जुड़ती हैं तो वाहन, खनिज और परिवहन प्रक्रिया की निगरानी अधिक प्रभावी हो सकती है।
ऐसी व्यवस्था में विभाग के लिए संदिग्ध गतिविधियों को चिन्हित करना आसान होगा और कार्रवाई के लिए डिजिटल रिकॉर्ड भी उपलब्ध रहेगा।
सबसे बड़ा लक्ष्य-वैध खनन को बढ़ावा, अवैध परिवहन पर रोक
RFID व्यवस्था लागू होने के बाद खनन क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने, अवैध खनन से जुड़े परिवहन पर नियंत्रण करने और सरकारी राजस्व को सुरक्षित रखने की उम्मीद है। हालांकि, तकनीक की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि RFID टैग, रीडर, GPS, वे-ब्रिज और विभागीय डिजिटल सिस्टम आपस में कितनी प्रभावी तरह से काम करते हैं।
कुल मिलाकर, खनन वाहनों की RFID आधारित डिजिटल पहचान उत्तराखंड में खनिज परिवहन को कागजी निगरानी से तकनीक आधारित निगरानी की ओर ले जाने वाला कदम है। इससे समय की बचत, बेहतर ट्रैकिंग और पारदर्शिता के साथ-साथ अवैध खनन पर कार्रवाई के लिए विभाग को मजबूत डिजिटल आधार मिलने की उम्मीद है।