जेलों से सैन्य संस्थानों तक शिक्षा का विस्तार: उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की नई पहल
हरिद्वार, सितारगंज केंद्रीय और हल्द्वानी कारागार में खुले शैक्षिक केंद्र, रानीखेत के कुमाऊं रेजिमेंट और रुड़की के बंगाल इंजीनियर ग्रुप में भी शुरू हुई उच्च शिक्षा की सुविधा

शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। विश्वविद्यालय ने प्रदेश के हरिद्वार जिला कारागार, सितारगंज केंद्रीय कारागार और हल्द्वानी कारागार में अपने शैक्षिक केंद्र स्थापित किए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से इच्छुक बंदियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है। विश्वविद्यालय का मानना है कि शिक्षा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का सबसे प्रभावी माध्यम है और इसके जरिए बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।

डिजिटल माध्यम से कैदियों के साथ नियमित संवाद संभव नहीं होने के कारण विश्वविद्यालय ने संबंधित सत्र की सभी पाठ्यपुस्तकें और अध्ययन सामग्री सीधे जेलों तक पहुंचाई हैं, ताकि शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक बंदियों की पढ़ाई बाधित न हो। अब तक 40 से अधिक बंदी विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में शामिल हो चुके हैं, जबकि कई अन्य बंदियों ने भी आगे पढ़ाई करने में रुचि दिखाई है।

फिलहाल नॉन-प्रैक्टिकल पाठ्यक्रमों का संचालन
कारागारों में प्रैक्टिकल पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति और आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध न होने के कारण फिलहाल केवल नॉन-प्रैक्टिकल कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। इनमें आर्ट्स, कॉमर्स, स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम शामिल हैं। विश्वविद्यालय का उद्देश्य बंदियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि वे रिहाई के बाद आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जी सकें।

सैन्य संस्थानों तक भी पहुंची विश्वविद्यालय की शिक्षा
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने अपनी शिक्षा की पहुंच केवल कारागारों तक ही सीमित नहीं रखी है। विश्वविद्यालय ने रानीखेत स्थित कुमाऊं रेजिमेंट सेंटर तथा रुड़की स्थित बंगाल इंजीनियर ग्रुप (बीईजी एंड सेंटर) में भी अपने शैक्षिक केंद्र स्थापित किए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से सैन्य एवं अर्धसैनिक संस्थानों से जुड़े कार्मिकों को भी उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है।

भविष्य में अन्य संस्थानों तक होगा विस्तार
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने बताया कि विश्वविद्यालय का प्रयास भविष्य में अर्धसैनिक बलों, रक्षा प्रतिष्ठानों और अन्य संस्थानों में भी अपने शैक्षिक केंद्र स्थापित करने का है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसे प्रत्येक इच्छुक व्यक्ति तक शिक्षा पहुंचाना है, जो किसी कारणवश नियमित शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाया।

प्रो. लोहनी ने बताया कि विश्वविद्यालय में स्नातक स्तर पर प्रवेश के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता आवश्यक है। इसलिए जिन लोगों ने अभी तक हाईस्कूल या इंटरमीडिएट उत्तीर्ण नहीं किया है, वे पहले एनआईओएस (NIOS) अथवा अन्य मान्यता प्राप्त ओपन स्कूलों से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करें। इसके बाद उन्हें उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के विभिन्न स्नातक एवं उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाएगा।

"उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षा को हर उस व्यक्ति तक पहुंचाना है, जो किसी कारणवश नियमित शिक्षा से वंचित रह गया है। हमने हरिद्वार, सितारगंज केंद्रीय और हल्द्वानी कारागारों के साथ-साथ रानीखेत के कुमाऊं रेजिमेंट सेंटर और रुड़की के बंगाल इंजीनियर ग्रुप में भी शैक्षिक केंद्र स्थापित किए हैं। हमारा प्रयास है कि भविष्य में अर्धसैनिक बलों और अन्य संस्थानों में भी ऐसे केंद्र खोले जाएं। शिक्षा के माध्यम से हम अधिक से अधिक लोगों को आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना चाहते हैं।" केंद्रीय और हल्द्वानी कारागारों के साथ-साथ रानीखेत के कुमाऊं रेजिमेंट सेंटर और रुड़की के बंगाल इंजीनियर ग्रुप में भी शैक्षिक केंद्र स्थापित किए हैं। हमारा प्रयास है कि भविष्य में अर्धसैनिक बलों और अन्य संस्थानों में भी ऐसे केंद्र खोले जाएं। शिक्षा के माध्यम से हम अधिक से अधिक लोगों को आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना चाहते हैं।" ::-प्रो. नवीन चंद्र लोहनी, कुलपति उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय
शिक्षा के माध्यम से पुनर्वास की पहल
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की यह पहल केवल उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के उन वर्गों तक शिक्षा पहुंचाने का प्रयास है जो परिस्थितियों के कारण इससे दूर रह गए। कारागारों, सैन्य संस्थानों और भविष्य में अन्य अर्धसैनिक संगठनों तक शिक्षा का विस्तार विश्वविद्यालय की सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह पहल शिक्षा को वास्तव में "सबके लिए, हर जगह" उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।