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01 Aug, 2026 by Admin

अब ATS से ही होगी व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच, मैन्युअल व्यवस्था पूरी तरह बंद


कंप्यूटरीकृत परीक्षण के बाद ही मिलेगा फिटनेस प्रमाणपत्र, सीमित केंद्रों के कारण पहाड़ी जिलों के वाहन स्वामियों की बढ़ी परेशानी

हल्द्वानी। केंद्र सरकार के नए नियमों के तहत अब जिन क्षेत्रों में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) संचालित हैं, वहां व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच केवल एटीएस के माध्यम से ही की जाएगी। इसके साथ ही मैन्युअल फिटनेस जांच की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। नई व्यवस्था का उद्देश्य वाहन फिटनेस परीक्षण को पूरी तरह वैज्ञानिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है, ताकि सड़क पर केवल सुरक्षित और मानकों पर खरे उतरने वाले वाहन ही संचालित हो सकें।नई प्रणाली के तहत वाहनों की जांच आधुनिक मशीनों और कंप्यूटरीकृत उपकरणों से होगी। परीक्षण के दौरान ब्रेक, सस्पेंशन, स्टीयरिंग, हेडलाइट, व्हील अलाइनमेंट, प्रदूषण स्तर सहित अन्य तकनीकी मानकों की स्वचालित जांच की जाएगी। सभी मानकों पर सफल होने के बाद ही वाहन को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।

आरटीओ गुरदेव सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार अब व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) के माध्यम से ही की जाएगी। जिन स्थानों पर एटीएस संचालित हैं, वहां मैन्युअल फिटनेस जांच की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत वाहन की फिटनेस का परीक्षण पूरी तरह मशीनों और कंप्यूटर आधारित उपकरणों से किया जाता है। जांच के दौरान ब्रेक, सस्पेंशन, हेडलाइट, प्रदूषण स्तर, स्टीयरिंग, व्हील अलाइनमेंट सहित कई तकनीकी मानकों का स्वचालित परीक्षण किया जाता है। सभी निर्धारित मानकों पर वाहन के सफल पाए जाने के बाद ही फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी, वैज्ञानिक और विश्वसनीय है, जिससे मानवीय हस्तक्षेप की संभावना कम होती है। आरटीओ ने वाहन स्वामियों से समय रहते ऑनलाइन स्लॉट बुक कर एटीएस केंद्रों पर फिटनेस जांच कराने की अपील की, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

इस नई व्यवस्था के बीच सीमित एटीएस केंद्र होने से वाहन स्वामियों की मुश्किलें भी बढ़ी हैं। विशेष रूप से पर्वतीय जिलों के वाहन संचालकों को फिटनेस जांच के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ रहा है, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं।

एटीएस सेंटर हल्द्वानी के सेंट्रल हेड राजू जोशी ने बताया कि केंद्र में प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन फिटनेस जांच के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि एटीएस सेंटर में प्रतिदिन 248 स्लॉट उपलब्ध हैं, जिनमें 100 स्लॉट भारी (हेवी) वाहनों और 148 स्लॉट हल्के (लाइट) वाहनों के लिए निर्धारित हैं। वर्तमान में प्रतिदिन करीब 40 से 50 वाहन ऑनलाइन स्लॉट बुक कर फिटनेस परीक्षण के लिए पहुंच रहे हैं।

राजू जोशी ने बताया कि प्रदेश में एटीएस केंद्रों की संख्या अभी सीमित होने के कारण अल्मोड़ा सहित अन्य पर्वतीय जिलों के वाहन स्वामी भी हल्द्वानी एटीएस सेंटर में फिटनेस जांच कराने आ रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में अन्य जिलों में भी एटीएस केंद्र शुरू होने से वाहन स्वामियों को अपने नजदीकी क्षेत्र में ही यह सुविधा मिल सकेगी, जिससे समय और परिवहन लागत दोनों में कमी आएगी।

परिवहन विभाग का कहना है कि ऑटोमेटेड फिटनेस जांच व्यवस्था लागू होने से फर्जी फिटनेस प्रमाणपत्रों पर रोक लगेगी और सड़क सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। विभाग ने सभी व्यावसायिक वाहन स्वामियों से समय पर ऑनलाइन स्लॉट बुक कर अपने वाहनों की फिटनेस जांच कराने की अपील की है।

मुख्य बिंदु

एटीएस वाले क्षेत्रों में मैन्युअल फिटनेस जांच पूरी तरह बंद।


मशीनों और कंप्यूटरीकृत प्रणाली से होगी वाहनों की जांच।


सफल परीक्षण के बाद ही जारी होगा फिटनेस प्रमाणपत्र।


हल्द्वानी एटीएस में प्रतिदिन 248 स्लॉट उपलब्ध।


फिलहाल 40–50 वाहन रोजाना जांच के लिए पहुंच रहे हैं।


सीमित एटीएस केंद्रों के कारण पर्वतीय जिलों के वाहन स्वामियों को दूसरे शहरों का रुख करना पड़ रहा है।

परिवहन विभाग के अनुसार वाहन स्वामी ऑनलाइन माध्यम से भी ATS में फिटनेस जांच के लिए आवेदन और स्लॉट बुक कर सकते हैं। विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था से फर्जी फिटनेस प्रमाणपत्रों पर रोक लगेगी और सड़क पर केवल तकनीकी रूप से सुरक्षित वाहन ही संचालित हो सकेंगे।