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26 Sep, 2026 Kuldeep s Rautela by Kuldeep s Rautela

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महिला आरक्षण को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं की खारिज, छात्रसंघ चुनाव का रास्ता साफ

नैनीताल। उत्तराखंड में छात्रसंघ चुनाव में महिला आरक्षण को लेकर चल रहे विवाद पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने महिला आरक्षण समेत छात्रसंघ चुनाव प्रक्रिया को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट के फैसले के बाद चुनाव प्रक्रिया को लेकर बनी कानूनी अड़चन फिलहाल दूर हो गई है।
मामले में कई छात्र नेताओं की ओर से हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई थीं। याचिकाओं में सरकार की ओर से जारी महिला आरक्षण संबंधी शासनादेश (जीओ) को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि छात्रसंघ चुनाव की तारीखों का ऐलान 10 सितंबर को किया गया था, जबकि महिला आरक्षण से संबंधित शासनादेश 18 सितंबर को जारी किया गया। ऐसे में चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद आरक्षण लागू किए जाने की वैधता पर सवाल उठाए गए थे।

सरकार के अधिकार पर भी उठाए गए सवाल

याचिकाओं में यह भी कहा गया था कि कुमाऊं विश्वविद्यालय एक स्वायत्त (ऑटोनॉमस) संस्था है। ऐसे में सरकार की ओर से विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में आरक्षण को लेकर जारी किए गए निर्देशों के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल उठाया गया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से चुनाव में आरक्षण की व्यवस्था को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई गई थी। उनका कहना था कि छात्रसंघ के कुछ पदों को छात्राओं के लिए आरक्षित किया गया है, जबकि अध्यक्ष और सचिव जैसे प्रमुख पदों पर यह व्यवस्था लागू नहीं की गई।

कोर्ट ने क्या माना?

मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सभी संबंधित याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि छात्रसंघ चुनाव में आरक्षण निर्धारित करने और उससे संबंधित शासनादेश जारी करने का अधिकार सरकार के पास है। इसी आधार पर अदालत ने याचिकाओं को सुनवाई योग्य नहीं माना।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद महिला आरक्षण को लेकर चल रहा कानूनी विवाद समाप्त हो गया है और छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।