नैनीताल में करीब 20 बच्चों के बीमार पड़ने से स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, जांच के लिए लिए गए ब्लड और पानी के सैंपल
13 Aug, 2026
by Admin
ज्यूलिकोट क्षेत्र में 20 से अधिक छात्र बीमार, पीलिया की पुष्टि की जानकारी; दूषित पेयजल को लेकर ग्रामीणों में चिंता
नैनीताल। हल्द्वानी-नैनीताल मार्ग पर ज्यूलिकोट क्षेत्र में एक स्कूल में 20 से अधिक छात्रों के बीमार होने का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि छात्रों को पेट दर्द समेत कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हुईं। जांच के दौरान कुछ छात्रों में पीलिया पाए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, बच्चों के बीमार पड़ने का वास्तविक कारण क्या है, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
छात्रों के स्वास्थ्य को देखते हुए स्कूल प्रबंधन ने एहतियात के तौर पर स्कूल बंद कर दिया है। बताया गया है कि स्कूल की छुट्टियों को आगामी राखी अवकाश के साथ जोड़ दिया गया है और स्कूल के 1 सितंबर से दोबारा खुलने की संभावना है।
वीरभट्टी समेत कई इलाकों में दूषित पानी की शिकायत
मामले के बीच ज्यूलिकोट और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वीरभट्टी, छिंडां मल्ला, गांजा, बगरीखोड़, छिंडां तल्ला और सड़ियाताल सहित आसपास के इलाकों के ग्रामीणों की ओर से पहले भी दूषित पेयजल की शिकायतें सामने आने की बात कही गई है।
ग्रामीणों का दावा है कि इन क्षेत्रों में पीलिया, डायरिया, उल्टी-दस्त, बुखार और पेचिश जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के मामले सामने आते रहे हैं। हालांकि, इन बीमारियों का कारण दूषित पानी ही है, इसकी पुष्टि जांच रिपोर्ट के आधार पर ही हो सकेगी।
पहले भी लिए जा चुके हैं पानी के नमूने
स्थानीय लोगों के मुताबिक क्षेत्र में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं। शिकायतों के बाद जल संस्थान की ओर से पानी के नमूने लिए जाने और स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य शिविर लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। ग्रामीणों का कहना है कि इसके बावजूद पेयजल समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
बच्चों के बीमार पड़ने के बाद ग्रामीणों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पेयजल लाइन में कहीं गंदा या सीवर का पानी मिल रहा है तो इसकी वास्तविक वजह का पता लगाकर उसे स्थायी रूप से दूर किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने प्रशासन और जल संस्थान से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल के नमूनों की वैज्ञानिक जांच कराई जाए। यदि पानी दूषित पाया जाता है तो प्रभावित गांवों में तत्काल वैकल्पिक पेयजल की व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि केवल पानी के सैंपल लेने और अस्थायी व्यवस्थाएं करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।
बच्चों के बीमार पड़ने से बढ़ी चिंता
स्कूली बच्चों में पीलिया समेत स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की जानकारी सामने आने के बाद क्षेत्र में चिंता का माहौल है। खासकर ऐसे समय में जब आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी लंबे समय से पेयजल की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है।
हालांकि, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की जांच पूरी होने से पहले बच्चों की बीमारी को सीधे दूषित पानी से जोड़ना उचित नहीं होगा। फिलहाल पानी और स्वास्थ्य संबंधी नमूनों की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
सीएमओ नैनीताल डॉ. रश्मि पंत ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम को मौके पर भेजा गया है। टीम द्वारा प्रभावित लोगों की स्वास्थ्य जांच करने के साथ ब्लड सैंपल और पानी के नमूने लिए गए हैं। सभी नमूनों को जांच के लिए भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी के वास्तविक कारणों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। ::-डॉ. रश्मि पंत सीएमओ, नैनीताल
डॉ. पंत के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग आसपास के क्षेत्रों में भी निगरानी कर रहा है। यदि कहीं और इस तरह के मामले सामने आते हैं तो वहां भी तत्काल स्वास्थ्य टीम भेजकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की निगरानी, बच्चों के स्वास्थ्य की स्थिति और पानी के नमूनों की जांच पर सबकी नजर है। यदि जांच में पेयजल दूषित पाया जाता है तो प्रशासन और जल संस्थान के सामने सप्लाई लाइन, जल स्रोत और संभावित प्रदूषण के कारणों का पता लगाकर स्थायी समाधान करने की चुनौती होगी।
वहीं ग्रामीणों की मांग है कि बच्चों और आम लोगों के स्वास्थ्य को देखते हुए जांच प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और यदि पेयजल में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है तो उसे तत्काल दूर किया जाए। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बच्चों के बीमार पड़ने और क्षेत्र में सामने आ रही स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं।