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21 Aug, 2026 by Admin

नैनीताल/हल्द्वानी। उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी के बेलबाबा क्षेत्र में शिफ्ट करने को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले में हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट शिफ्टिंग से जुड़े प्रस्ताव और प्रक्रिया को लेकर अपना पक्ष रखा गया। वहीं केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि उसे राज्य सरकार की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव प्राप्त होने की जानकारी नहीं है। इससे सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के दावों को लेकर स्थिति चर्चा में रही।

बेलबाबा की जमीन पर भी उठे सवाल

हाईकोर्ट को हल्द्वानी के बेलबाबा क्षेत्र में प्रस्तावित नए परिसर के लिए चिन्हित भूमि को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता रमन शाह की ओर से दलील दी गई कि प्रस्तावित जमीन वन भूमि है और इसके लिए केंद्र की आवश्यक मंजूरी का सवाल उठता है। याचिका में पर्यावरणीय संवेदनशीलता और वन भूमि के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
याचिका में नैनीताल जिलाधिकारी की ओर से वन विभाग की भूमि उपलब्ध कराने से जुड़े पत्र को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि रिजर्व फॉरेस्ट की भूमि को लेकर प्रशासनिक स्तर पर निर्णय लेने के अधिकार और प्रक्रिया की जांच जरूरी है।

सरकार ने हल्द्वानी को बताया विकास के लिहाज से उपयुक्त

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से हल्द्वानी में हाईकोर्ट परिसर बनाने के पक्ष में दलीलें रखी गईं। सरकार का पक्ष था कि बड़े संस्थानों के लिए जरूरी आधारभूत सुविधाएं और भविष्य का विस्तार हल्द्वानी जैसे मैदानी क्षेत्र में अधिक व्यावहारिक तरीके से किया जा सकता है। इसी संदर्भ में सरकार की ओर से पर्वतीय क्षेत्रों में विकास की चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया।
हालांकि, सरकार की इस दलील को लेकर पहाड़ और मैदानी क्षेत्र के बीच विकास को लेकर नई बहस छिड़ गई है। उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने भी सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा है कि विकास का मॉडल पूरे प्रदेश को ध्यान में रखकर तय होना चाहिए।

पहले ही बढ़ चुकी है हाईकोर्ट शिफ्टिंग की प्रक्रिया

हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने का मामला लंबे समय से चर्चा में है। जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के 2024 के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें हल्द्वानी की वैकल्पिक जमीन के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को हल्द्वानी में चिन्हित जमीन हाईकोर्ट को सौंपने की दिशा में आगे बढ़ने को कहा था।
इसके बाद राज्य सरकार ने हल्द्वानी में प्रस्तावित हाईकोर्ट परिसर के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज की। अगस्त में राज्य मंत्रिमंडल ने बेलबाबा क्षेत्र में भूमि उपलब्ध कराने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

अब फैसले पर टिकी निगाहें

फिलहाल हाईकोर्ट ने याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। ऐसे में बेलबाबा की भूमि, हाईकोर्ट की शिफ्टिंग की प्रक्रिया और वन भूमि से जुड़े सवालों पर अदालत का फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत के फैसले के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रस्तावित स्थल पर आगे की प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ेगी।