
भीमताल। भीमताल विकासखंड में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को वैज्ञानिक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। खण्ड विकास कार्यालय, भीमताल एवं नीलकंठ जीरो वेस्ट सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इंटर्नशिप कार्यक्रम के अंतर्गत ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, भीमताल परिसर के बीबीए तृतीय वर्ष के छात्र-छात्राओं ने शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का विस्तृत बेसलाइन सर्वे सफलतापूर्वक पूरा किया।
सर्वेक्षण का उद्देश्य भीमताल क्षेत्र में कचरा संग्रहण, निस्तारण, स्रोत पर कचरा पृथक्करण, नागरिक जागरूकता, पर्यावरणीय दृष्टिकोण और मौजूदा व्यवस्था का आकलन करना था। इस अध्ययन से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग भविष्य में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजना तैयार करने के साथ-साथ शोध एवं शैक्षणिक कार्यों में भी किया जाएगा।

छह सदस्यीय छात्र दल—हिमांशु नेगी, ब्योम जोशी, विवेक दानू, कृष्णा रावल, कृष्णा दसिला और आकेश वर्मा—ने नीलकंठ जीरो वेस्ट सोसाइटी एवं खण्ड विकास कार्यालय के मार्गदर्शन में यह सर्वेक्षण किया।
शहरी क्षेत्र: भीमताल नगर पालिका के सभी 9 वार्ड
ग्रामीण क्षेत्र: सांगुड़ीगांव, मेहरागांव एवं रानीबाग न्याय पंचायतों के अंतर्गत 23 गांवों के 304 परिवार
विद्यार्थियों ने घर-घर जाकर साक्षात्कार, प्रत्यक्ष अवलोकन और आमने-सामने संवाद के माध्यम से कचरा उत्पादन, संग्रहण, पृथक्करण, निस्तारण, पर्यावरणीय जागरूकता और उपयोगकर्ता शुल्क जैसे पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया।शहरी क्षेत्र: प्रतिदिन 8.4 टन कचरा, पर्यटन सीजन में बढ़कर 9 टन तकसर्वे के अनुसार भीमताल नगर पालिका क्षेत्र में प्रतिदिन औसतन 8.4 टन ठोस अपशिष्ट उत्पन्न होता है, जो पर्यटन सीजन में लगभग 9 टन प्रतिदिन तक पहुंच जाता है।

अधिकांश नागरिक वर्तमान व्यवस्था से संतुष्ट।हालांकि भूमि की कमी के कारण भीमताल में अभी तक कोई कचरा प्रसंस्करण संयंत्र नहीं है, इसलिए एकत्रित कचरे का निस्तारण हल्द्वानी ट्रेंचिंग ग्राउंड में किया जाता है।
ग्रामीण क्षेत्र: जैविक कचरे का पारंपरिक उपयोग, प्लास्टिक बना चिंता का विषय
ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित कचरा संग्रहण व्यवस्था नहीं होने के कारण अधिकांश परिवार पारंपरिक तरीकों से कचरे का निस्तारण कर रहे हैं।
जैविक कचरा पशुओं को खिलाया जाता है, जो पर्यावरण-अनुकूल व्यवस्था है।
प्लास्टिक, कांच और अन्य सूखे कचरे को खुले में फेंकने या जलाने की प्रवृत्ति अब भी बनी हुई है।
पर्यावरण के प्रति जागरूक अधिकांश परिवार नियमित कचरा संग्रहण सुविधा मिलने पर लगभग ₹50 प्रतिमाह उपयोगकर्ता शुल्क देने को तैयार हैं।

डुनसिल एवं चकबहेड़ी ग्राम पंचायतों के प्रधानों ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए अलग बजट, सफाई कर्मियों और कचरा संग्रहण वाहनों की व्यवस्था की मांग की। वहीं अमिया और खैरोला पांडे ग्राम पंचायतों के प्रधानों ने वर्तमान पारंपरिक व्यवस्था को संतोषजनक बताया।
खण्ड विकास अधिकारी ने नीलकंठ जीरो वेस्ट सोसाइटी, ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं तथा सभी सहयोगियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासन, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों की सहभागिता से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का एक स्थायी और प्रभावी मॉडल विकसित किया जा सकता है।