
पितृपक्ष में गया-पुष्कर यात्रा
श्रद्धया दीयते यत्तु तत् श्राद्धं परिकीर्तितम्।
सरल अर्थ:
श्रद्धा और सम्मान के साथ पितरों के निमित्त किया गया कर्म ही श्राद्ध कहलाता है। पितृपक्ष अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर है।
पितृपक्ष के अवसर पर 26 सितंबर 2026 से 9 दिवसीय पिंडदान एवं तर्पण यात्रा प्रस्तावित है। इसकी सहयोग राशि 21,500 रुपये है।
यात्रा में प्रयागराज, काशी विश्वनाथ, सारनाथ, बोधगया, गया जी, मथुरा, वृंदावन, पुष्कर और मेहंदीपुर बालाजी को शामिल किया गया है। पुष्कर में ब्रह्मकुंड स्नान, ब्रह्मा जी के दर्शन एवं तर्पण की व्यवस्था भी पैकेज का हिस्सा बताई गई है।