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10 Oct, 2026 Kuldeep s Rautela by Kuldeep s Rautela

हल्द्वानी में अंतरराष्ट्रीय नर्सिंग सम्मेलन IANETL-2026, 600 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा; AI और डिजिटल लर्निंग पर हुआ मंथन

हल्द्वानी। एमआईईटी कुमाऊं कॉलेज ऑफ नर्सिंग, हल्द्वानी में नर्सिंग शिक्षा को आधुनिक, तकनीक आधारित और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन IANETL-2026 का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देश-विदेश के करीब 600 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें 450 प्रतिभागी ऑफलाइन और 150 प्रतिभागी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। सम्मेलन के दौरान नर्सिंग शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल लर्निंग, सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण और केस स्टडी जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
सम्मेलन में भारत के साथ कुवैत और यूनाइटेड किंगडम के विशेषज्ञों ने भी भागीदारी की। कार्यक्रम का उद्देश्य नर्सिंग शिक्षा के क्षेत्र में नवीन शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देना, अंतरराष्ट्रीय अनुभवों का आदान-प्रदान करना और विद्यार्थियों को स्वास्थ्य सेवाओं की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की संभावनाओं पर चर्चा करना रहा।

नर्सिंग शिक्षा में आधुनिक तकनीक की भूमिका पर चर्चा

सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच नर्सिंग शिक्षा को भी आधुनिक तकनीकों से जोड़ना आवश्यक है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल लर्निंग के माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के साथ विद्यार्थियों को नई तकनीकों से परिचित कराने पर चर्चा हुई।
सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण को भी नर्सिंग शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया। इस पद्धति के माध्यम से विद्यार्थियों को वास्तविक परिस्थितियों जैसी अभ्यास व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सकती है, जिससे मरीजों की देखभाल, आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने और चिकित्सकीय प्रक्रियाओं को समझने में मदद मिलती है।

वहीं, केस स्टडी के माध्यम से विद्यार्थियों को अलग-अलग परिस्थितियों का विश्लेषण करने, समस्याओं को समझने और उचित निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने के अवसरों पर भी विचार किया गया।
विशेषज्ञों ने नर्सिंग शिक्षा में तकनीक के इस्तेमाल के साथ मानवीय संवेदनशीलता, मरीजों की सुरक्षा और व्यावहारिक प्रशिक्षण के महत्व को भी रेखांकित किया।

देश-विदेश के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

IANETL-2026 में भारत के अलावा कुवैत और यूनाइटेड किंगडम के विशेषज्ञों की भागीदारी ने सम्मेलन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप दिया। विभिन्न देशों में नर्सिंग शिक्षा के क्षेत्र में अपनाई जा रही शिक्षण पद्धतियों, तकनीकी नवाचारों और प्रशिक्षण के तरीकों पर अनुभव साझा करने का अवसर मिला।
ऐसे आयोजनों के माध्यम से शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को नर्सिंग शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे बदलावों को समझने तथा अपने ज्ञान को व्यापक बनाने का अवसर मिलता है। सम्मेलन में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से प्रतिभागियों की भागीदारी ने विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक साझा मंच उपलब्ध कराया।

केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा ने किया सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ

सम्मेलन के दौरान आयोजित सांस्कृतिक संध्या में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा भी शामिल हुए। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
अपने संबोधन में अजय टम्टा ने उत्तराखंड, विशेष रूप से कुमाऊं की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और विशिष्ट पहचान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय परंपराएं यहां की पहचान हैं, जिन्हें आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण है।ए।उन्होंने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग क्षेत्र में नई परियोजनाओं, बेहतर सड़क संपर्क और आधारभूत संरचना के विकास के महत्व पर भी अपने विचार साझा कि

इसके साथ ही उन्होंने चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में हुई विभिन्न उपलब्धियों का उल्लेख किया। अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज सहित कुमाऊं क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाओं के विकास की चर्चा करते हुए उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के महत्व पर जोर दिया।

बीएस बिष्ट ने बताई सम्मेलन की उपयोगिता

बीएस बिष्ट,

निदेशक, एमआईईटी कुमाऊं कॉलेज

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य नर्सिंग शिक्षा के क्षेत्र में नए विचारों, आधुनिक तकनीकों और बेहतर शिक्षण पद्धतियों को प्रोत्साहित करना है। स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार बदलाव हो रहे हैं और इन बदलावों के अनुरूप नर्सिंग शिक्षा को विकसित करना आवश्यक है। ऐसे सम्मेलनों के
माध्यम से देश-विदेश के विशेषज्ञों को अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिलता है। इससे शिक्षकों और विद्यार्थियों को नई तकनीकों को समझने तथा शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

नेहा रौतेला ने बताया तकनीक आधारित प्रशिक्षण का महत्व


नेहा रौतेला, असिस्टेंट प्रोफेसर
नर्सिंग शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल लर्निंग और सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है। इन तकनीकों के माध्यम से विद्यार्थियों को विषयों को बेहतर तरीके से समझने और व्यावहारिक परिस्थितियों के लिए तैयार होने में मदद मिल सकती है। हालांकि, तकनीक के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण, मरीजों के प्रति संवेदनशीलता और मानवीय व्यवहार भी नर्सिंग शिक्षा के अहम पहलू हैं। इस तरह के सम्मेलन शिक्षकों और विद्यार्थियों को नए अनुभवों से सीखने का अवसर प्रदान करते हैं।

तरुण सक्सेना ने गुणवत्तापूर्ण नर्सिंग शिक्षा पर दिया जोर

तरुण सक्सेना, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर
गुणवत्तापूर्ण नर्सिंग शिक्षा के लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और व्यावहारिक प्रशिक्षण के बीच संतुलन जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन विद्यार्थियों और शिक्षकों को वैश्विक स्तर पर अपनाई जा रही नई शिक्षण पद्धतियों से परिचित होने का अवसर देते हैं। हमारा प्रयास होना चाहिए कि विद्यार्थियों को ऐसा प्रशिक्षण मिले, जिससे वे स्वास्थ्य सेवाओं की बदलती जरूरतों को समझ सकें और मरीजों की दे१ में अपनी जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभा सकें।

नर्सिंग शिक्षा के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण पहल

तीन दिवसीय IANETL-2026 सम्मेलन में नर्सिंग शिक्षा को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने, व्यावहारिक प्रशिक्षण को बेहतर बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।
सम्मेलन में हुई चर्चाओं ने यह रेखांकित किया कि भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रशिक्षित नर्सिंग पेशेवरों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। ऐसे में तकनीकी दक्षता के साथ मरीजों की सुरक्षा, संवेदनशीलता और गुणवत्तापूर्ण देखभाल पर ध्यान देना आवश्यक है। सम्मेलन को नर्सिंग शिक्षा के क्षेत्र में नए विचारों और संभावनाओं पर चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा सकता है।